वक्रतुण्ड महाकाय
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha
Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada
अर्थ
हे घुमावदार सूँड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कामों को हमेशा बिना विघ्न के पूरा करें.
| जप-संख्या (परंपरा) | 11 |
| शुभ दिन | हर शुभ काम से पहले |
जप कैसे करें
- सुबह स्नान के बाद, शांत और साफ़ जगह पर बैठें.
- रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 108 बार जप एक माला कहलाता है.
- उच्चारण साफ़ रखें; मन में या धीमे स्वर में जप किया जा सकता है.
- जप के बाद कुछ पल शांत बैठें.