गुरु (बृहस्पति) मंत्र

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ॥

Om Graam Greem Graum Sah Gurave Namah

छोटा (एकाक्षरी) मंत्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः ॥

अर्थ

देवगुरु बृहस्पति को बीज अक्षरों सहित नमस्कार. इसे ज्ञान, विवाह, संतान और भाग्य के लिए जपने की परंपरा है.

जप-संख्या (परंपरा)19,000 — 40 दिनों में पूरा करने की परंपरा
शुभ दिनगुरुवार
ग्रह का रत्नपुखराज (येलो सफ़ायर)

जप कैसे करें

  • सुबह स्नान के बाद, शांत और साफ़ जगह पर बैठें.
  • रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 108 बार जप एक माला कहलाता है.
  • उच्चारण साफ़ रखें; मन में या धीमे स्वर में जप किया जा सकता है.
  • जप के बाद कुछ पल शांत बैठें.

ध्यान और साँस का अभ्यास