गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः ।
तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि ।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
Om Bhur Bhuvah Svah
Tat Savitur Varenyam
Bhargo Devasya Dhimahi
Dhiyo Yo Nah Prachodayat
अर्थ
हम उस सविता देव के श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग में व्याप्त है; वह हमारी बुद्धि को सही मार्ग की ओर प्रेरित करे. यह ऋग्वेद का मंत्र है.
| जप-संख्या (परंपरा) | 108 |
| शुभ दिन | प्रतिदिन, सुबह और शाम |
जप कैसे करें
- सुबह स्नान के बाद, शांत और साफ़ जगह पर बैठें.
- रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 108 बार जप एक माला कहलाता है.
- उच्चारण साफ़ रखें; मन में या धीमे स्वर में जप किया जा सकता है.
- जप के बाद कुछ पल शांत बैठें.