पंचांग — 21 नवंबर 2037, दिल्ली

पंचांग के पाँच अंग

तिथिचतुर्दशी (शुक्ल पक्ष) — समाप्त 01:55 AM (अगले दिन), फिर पूर्णिमा
नक्षत्रभरणी — समाप्त 08:04 AM (अगले दिन), फिर कृत्तिका
योगवरीयान — समाप्त 03:44 AM (अगले दिन), फिर परिघ
करणगर — समाप्त 01:10 PM, फिर वणिज
वारशनिवार
सूर्योदय06:48 AM
सूर्यास्त05:25 PM
चंद्र राशिमेष
सूर्य राशिवृश्चिक
मास (पूर्णिमांत)कार्तिक
मास (अमांत)कार्तिक
विक्रम संवत2094
शक संवत1959

शुभ और अशुभ समय

अभिजित मुहूर्त11:45 AM – 12:28 PM
राहु काल09:27 AM – 10:47 AM
यमगंड01:26 PM – 02:46 PM
गुलिक काल06:48 AM – 08:08 AM

राहु काल में नया काम, यात्रा या ख़रीदारी शुरू न करने की परंपरा है. ये समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 भागों में बाँटकर निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं.

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

काल06:48 AM – 08:08 AM
शुभ08:08 AM – 09:27 AM
रोग09:27 AM – 10:47 AM
उद्वेग10:47 AM – 12:06 PM
चर12:06 PM – 01:26 PM
लाभ01:26 PM – 02:46 PM
अमृत02:46 PM – 04:05 PM
काल04:05 PM – 05:25 PM

रात का चौघड़िया

लाभ05:25 PM – 07:05 PM
उद्वेग07:05 PM – 08:46 PM
शुभ08:46 PM – 10:26 PM
अमृत10:26 PM – 12:07 AM (अगले दिन)
चर12:07 AM (अगले दिन) – 01:47 AM (अगले दिन)
रोग01:47 AM (अगले दिन) – 03:28 AM (अगले दिन)
काल03:28 AM (अगले दिन) – 05:08 AM (अगले दिन)
लाभ05:08 AM (अगले दिन) – 06:49 AM (अगले दिन)

अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर सामान्य; उद्वेग, काल और रोग में नए काम से बचने की परंपरा है.

आने वाले व्रत

22 नवपूर्णिमा
3 दिसएकादशी (कृष्ण)
18 दिसएकादशी (शुक्ल)
22 दिसपूर्णिमा
1 जनएकादशी (कृष्ण)

सूर्योदय के समय की तिथि के नियम से, चुने गए शहर के हिसाब से.

पंचांग क्या है

पंचांग हिंदू कैलेंडर है. इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति) और करण (आधी तिथि). इसी से त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण कामों के लिए शुभ समय चुना जाता है.

यहाँ सभी मान चुने गए शहर के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, Lahiri अयनांश के साथ निकाले गए हैं. सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है.