पंचांग — 23 अक्टूबर 2030, दिल्ली
पंचांग के पाँच अंग
| तिथि | एकादशी (कृष्ण पक्ष) — समाप्त 10:21 AM, फिर द्वादशी |
| नक्षत्र | पूर्व फाल्गुनी — समाप्त 02:28 AM (अगले दिन), फिर उत्तर फाल्गुनी |
| योग | ब्रह्म — समाप्त 03:12 AM (अगले दिन), फिर इन्द्र |
| करण | बालव — समाप्त 10:21 AM, फिर कौलव |
| वार | बुधवार |
सूर्योदय06:26 AM
सूर्यास्त05:43 PM
चंद्र राशिसिंह
सूर्य राशितुला
मास (पूर्णिमांत)कार्तिक
मास (अमांत)आश्विन
विक्रम संवत2087
शक संवत1952
शुभ और अशुभ समय
| अभिजित मुहूर्त | 11:42 AM – 12:27 PM (बुधवार को वर्जित) |
| राहु काल | 12:05 PM – 01:29 PM |
| यमगंड | 07:51 AM – 09:16 AM |
| गुलिक काल | 10:40 AM – 12:05 PM |
राहु काल में नया काम, यात्रा या ख़रीदारी शुरू न करने की परंपरा है. ये समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 भागों में बाँटकर निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं.
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
| लाभ | 06:26 AM – 07:51 AM |
| अमृत | 07:51 AM – 09:16 AM |
| काल | 09:16 AM – 10:40 AM |
| शुभ | 10:40 AM – 12:05 PM |
| रोग | 12:05 PM – 01:29 PM |
| उद्वेग | 01:29 PM – 02:54 PM |
| चर | 02:54 PM – 04:19 PM |
| लाभ | 04:19 PM – 05:43 PM |
रात का चौघड़िया
| उद्वेग | 05:43 PM – 07:19 PM |
| शुभ | 07:19 PM – 08:54 PM |
| अमृत | 08:54 PM – 10:30 PM |
| चर | 10:30 PM – 12:05 AM (अगले दिन) |
| रोग | 12:05 AM (अगले दिन) – 01:41 AM (अगले दिन) |
| काल | 01:41 AM (अगले दिन) – 03:16 AM (अगले दिन) |
| लाभ | 03:16 AM (अगले दिन) – 04:52 AM (अगले दिन) |
| उद्वेग | 04:52 AM (अगले दिन) – 06:27 AM (अगले दिन) |
अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर सामान्य; उद्वेग, काल और रोग में नए काम से बचने की परंपरा है.
आने वाले व्रत
| 23 अक्टू | एकादशी (कृष्ण) |
| 26 अक्टू | अमावस्या |
| 5 नव | एकादशी (शुक्ल) |
| 10 नव | पूर्णिमा |
| 21 नव | एकादशी (कृष्ण) |
| 25 नव | अमावस्या |
| 5 दिस | एकादशी (शुक्ल) |
सूर्योदय के समय की तिथि के नियम से, चुने गए शहर के हिसाब से.
पंचांग क्या है
पंचांग हिंदू कैलेंडर है. इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति) और करण (आधी तिथि). इसी से त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण कामों के लिए शुभ समय चुना जाता है.
यहाँ सभी मान चुने गए शहर के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, Lahiri अयनांश के साथ निकाले गए हैं. सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है.