पंचांग — 19 मार्च 2026, दिल्ली
पंचांग के पाँच अंग
| तिथि | अमावस्या (कृष्ण पक्ष) — समाप्त 06:55 AM, फिर प्रतिपदा |
| नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद — समाप्त 04:05 AM (अगले दिन), फिर रेवती |
| योग | शुक्ल — समाप्त 01:15 AM (अगले दिन), फिर ब्रह्म |
| करण | नाग — समाप्त 06:55 AM, फिर किंस्तुघ्न |
| वार | गुरुवार |
सूर्योदय06:26 AM
सूर्यास्त06:31 PM
चंद्र राशिमीन
सूर्य राशिमीन
मास (पूर्णिमांत)चैत्र
मास (अमांत)फाल्गुन
विक्रम संवत2082
शक संवत1947
शुभ और अशुभ समय
| अभिजित मुहूर्त | 12:05 PM – 12:53 PM |
| राहु काल | 01:59 PM – 03:30 PM |
| यमगंड | 06:26 AM – 07:57 AM |
| गुलिक काल | 09:27 AM – 10:58 AM |
राहु काल में नया काम, यात्रा या ख़रीदारी शुरू न करने की परंपरा है. ये समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 भागों में बाँटकर निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं.
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
| शुभ | 06:26 AM – 07:57 AM |
| रोग | 07:57 AM – 09:27 AM |
| उद्वेग | 09:27 AM – 10:58 AM |
| चर | 10:58 AM – 12:29 PM |
| लाभ | 12:29 PM – 01:59 PM |
| अमृत | 01:59 PM – 03:30 PM |
| काल | 03:30 PM – 05:01 PM |
| शुभ | 05:01 PM – 06:31 PM |
रात का चौघड़िया
| अमृत | 06:31 PM – 08:01 PM |
| चर | 08:01 PM – 09:30 PM |
| रोग | 09:30 PM – 10:59 PM |
| काल | 10:59 PM – 12:28 AM (अगले दिन) |
| लाभ | 12:28 AM (अगले दिन) – 01:57 AM (अगले दिन) |
| उद्वेग | 01:57 AM (अगले दिन) – 03:27 AM (अगले दिन) |
| शुभ | 03:27 AM (अगले दिन) – 04:56 AM (अगले दिन) |
| अमृत | 04:56 AM (अगले दिन) – 06:25 AM (अगले दिन) |
अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर सामान्य; उद्वेग, काल और रोग में नए काम से बचने की परंपरा है.
आने वाले व्रत
| 19 मार्च | अमावस्या |
| 29 मार्च | एकादशी (शुक्ल) |
| 2 अप्रै | पूर्णिमा |
| 13 अप्रै | एकादशी (कृष्ण) |
| 17 अप्रै | अमावस्या |
| 27 अप्रै | एकादशी (शुक्ल) |
| 1 मई | पूर्णिमा |
सूर्योदय के समय की तिथि के नियम से, चुने गए शहर के हिसाब से.
पंचांग क्या है
पंचांग हिंदू कैलेंडर है. इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति) और करण (आधी तिथि). इसी से त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण कामों के लिए शुभ समय चुना जाता है.
यहाँ सभी मान चुने गए शहर के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, Lahiri अयनांश के साथ निकाले गए हैं. सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है.