राहु काल — 14 अक्टूबर 2042, दिल्ली

शुभ और अशुभ समय

अभिजित मुहूर्त11:43 AM – 12:30 PM
राहु काल02:59 PM – 04:26 PM
यमगंड09:14 AM – 10:40 AM
गुलिक काल12:07 PM – 01:33 PM

राहु काल में नया काम, यात्रा या ख़रीदारी शुरू न करने की परंपरा है. ये समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 भागों में बाँटकर निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं.

पंचांग के पाँच अंग

तिथिअमावस्या (कृष्ण पक्ष) — समाप्त 07:33 AM, फिर प्रतिपदा
नक्षत्रचित्रा — समाप्त 04:26 AM (अगले दिन), फिर स्वाति
योगवैधृति — समाप्त 09:00 PM, फिर विष्कुम्भ
करणनाग — समाप्त 07:33 AM, फिर किंस्तुघ्न
वारमंगलवार
सूर्योदय06:21 AM
सूर्यास्त05:52 PM
चंद्र राशिकन्या
सूर्य राशिकन्या
मास (पूर्णिमांत)आश्विन
मास (अमांत)भाद्रपद
विक्रम संवत2099
शक संवत1964

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

रोग06:21 AM – 07:47 AM
उद्वेग07:47 AM – 09:14 AM
चर09:14 AM – 10:40 AM
लाभ10:40 AM – 12:07 PM
अमृत12:07 PM – 01:33 PM
काल01:33 PM – 02:59 PM
शुभ02:59 PM – 04:26 PM
रोग04:26 PM – 05:52 PM

रात का चौघड़िया

काल05:52 PM – 07:26 PM
लाभ07:26 PM – 09:00 PM
उद्वेग09:00 PM – 10:33 PM
शुभ10:33 PM – 12:07 AM (अगले दिन)
अमृत12:07 AM (अगले दिन) – 01:40 AM (अगले दिन)
चर01:40 AM (अगले दिन) – 03:14 AM (अगले दिन)
रोग03:14 AM (अगले दिन) – 04:48 AM (अगले दिन)
काल04:48 AM (अगले दिन) – 06:21 AM (अगले दिन)

अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर सामान्य; उद्वेग, काल और रोग में नए काम से बचने की परंपरा है.

आने वाले व्रत

14 अक्टूअमावस्या
25 अक्टूएकादशी (शुक्ल)
28 अक्टूपूर्णिमा
8 नवएकादशी (कृष्ण)
12 नवअमावस्या
23 नवएकादशी (शुक्ल)
27 नवपूर्णिमा

सूर्योदय के समय की तिथि के नियम से, चुने गए शहर के हिसाब से.

पंचांग क्या है

पंचांग हिंदू कैलेंडर है. इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति) और करण (आधी तिथि). इसी से त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण कामों के लिए शुभ समय चुना जाता है.

यहाँ सभी मान चुने गए शहर के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, Lahiri अयनांश के साथ निकाले गए हैं. सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है.