पंचांग — 23 सितंबर 2034, दिल्ली

पंचांग के पाँच अंग

तिथिदशमी (शुक्ल पक्ष) — समाप्त 03:15 PM, फिर एकादशी
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा — समाप्त 10:31 PM, फिर श्रवण
योगअतिगण्ड — समाप्त 04:42 AM (अगले दिन), फिर सुकर्मा
करणगर — समाप्त 03:15 PM, फिर वणिज
वारशनिवार
सूर्योदय06:09 AM
सूर्यास्त06:16 PM
चंद्र राशिमकर
सूर्य राशिकन्या
मास (पूर्णिमांत)भाद्रपद
मास (अमांत)भाद्रपद
विक्रम संवत2091
शक संवत1956

शुभ और अशुभ समय

अभिजित मुहूर्त11:49 AM – 12:37 PM
राहु काल09:11 AM – 10:42 AM
यमगंड01:44 PM – 03:15 PM
गुलिक काल06:09 AM – 07:40 AM

राहु काल में नया काम, यात्रा या ख़रीदारी शुरू न करने की परंपरा है. ये समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 भागों में बाँटकर निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं.

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

काल06:09 AM – 07:40 AM
शुभ07:40 AM – 09:11 AM
रोग09:11 AM – 10:42 AM
उद्वेग10:42 AM – 12:13 PM
चर12:13 PM – 01:44 PM
लाभ01:44 PM – 03:15 PM
अमृत03:15 PM – 04:45 PM
काल04:45 PM – 06:16 PM

रात का चौघड़िया

लाभ06:16 PM – 07:46 PM
उद्वेग07:46 PM – 09:15 PM
शुभ09:15 PM – 10:44 PM
अमृत10:44 PM – 12:13 AM (अगले दिन)
चर12:13 AM (अगले दिन) – 01:42 AM (अगले दिन)
रोग01:42 AM (अगले दिन) – 03:12 AM (अगले दिन)
काल03:12 AM (अगले दिन) – 04:41 AM (अगले दिन)
लाभ04:41 AM (अगले दिन) – 06:10 AM (अगले दिन)

अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर सामान्य; उद्वेग, काल और रोग में नए काम से बचने की परंपरा है.

आने वाले व्रत

24 सितएकादशी (शुक्ल)
28 सितपूर्णिमा
8 अक्टूएकादशी (कृष्ण)
12 अक्टूअमावस्या
23 अक्टूएकादशी (शुक्ल)
27 अक्टूपूर्णिमा
6 नवएकादशी (कृष्ण)

सूर्योदय के समय की तिथि के नियम से, चुने गए शहर के हिसाब से.

पंचांग क्या है

पंचांग हिंदू कैलेंडर है. इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति) और करण (आधी तिथि). इसी से त्योहार, व्रत और महत्वपूर्ण कामों के लिए शुभ समय चुना जाता है.

यहाँ सभी मान चुने गए शहर के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से, Lahiri अयनांश के साथ निकाले गए हैं. सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है.